Saturday, January 23, 2021

"26 जनवरी को किसान परेड ऐतिहासिक होगी!" चौधरी राकेश टिकैत


किसान परेड में राजनैतिक दलों के झंडो और व्यक्तियों के शामिल होने पर रहेगी पूरी तरह से पाबंदी - भाकियू


गाजीपुर बॉर्डर पर 26 जनवरी की तैयारियां जोरों पर है। कल बिजनौर के किसान दिगम्बर सिंह के नेतृत्व में हजारों ट्रैक्टरों के साथ गाजीपुर बॉर्डर पर पहुंचे। लठ की जगह गन्ने पर संगठन और देश के झंडों को लगा के हजारों किसान देर रात धरने पर पहुंचे। रास्ते मे कई जगह किसानों के ट्रैक्टरों को रोकने का प्रयास किया गया लेकिन किसानों के जज्बे और तीन काले कानून से बचने के दृढ़ निश्चय उन्हें रोक नही पाये। 

भारतीय किसान यूनियन के राकेश टिकैत ने बताया कि कल (22-01-2021) से गाजीपुर बॉर्डर पर ट्रैक्टर आने शुरू हो गए है। 26 जनवरी के ट्रैक्टर परेड के लिये पश्चिमी उत्तर प्रदेश एवं  उत्तराखंड के हर जिलों से भारतीय किसान यूनियन के झंडे तले करीबन 25000-30000 ट्रैक्टर गाजीपुर बॉर्डर पर पहुचेंगे। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिलों को छोड़कर अन्य जिलों के कार्यकर्ता अपने जिले में ही 26 जनवरी को ट्रैक्टर परेड निकालेंगे। 

संगठन के ट्रैक्टरों को रोकने के लिये उत्तर प्रदेश प्रशासन, संगठन के कार्यकर्ताओं को नोटिस भिजवा रहे है। जिसमें उन पर लॉक डाउन तोड़ने एवं धारा 144 का उलंघन करने पर कानूनी करवाई करने दबाव डाल के ट्रैक्टर परेड नही करने के लिये कहा जा रहा है। आज भी अलीगढ़ सहित कई जिलों में ट्रैक्टरों को रोक दिया गया है। किसान वही पर धरना दे रहे है। 

विभिन्न जिलों में प्रशासन की तरफ से कार्यकर्ताओं को धमकियां भी दी जा रही एवं प्रशासन पुलिस को भी उनके घर और गावँ के आसपास लगा रखा है। दिल्ली की तरफ आने वाले रास्तों पर चेकिंग और बैरिकेड लगा के किसानों को रोकने का भरपूर प्रयास किया जा रहा है। 

"सरकार, किसानों को कितना भी रोकने की कोशिश कर ले लेकिन गणतंत्र दिवस पर किसानों को अपने देश के स्वाभिमान दिवस को मनाने से रोक नही सकते। देश का मजबूर किसान आज अपने हक और संघर्षो के लिये खड़ा है।" धर्मेंद्र मालिक, भाकियू। 

सरकार के नकारात्मक और दंभपूर्ण रवैये से किसान नाराज है। मिट्टी की पूजा करने वाला किसान देश के गर्व के दिन को धूम धाम से हर ट्रैक्टर पर तिरंगे के साथ मनायेगा। देश की सरकार किसानों से उनका देश प्रेम नही छीन सकती। 26 जनवरी को किसान दिल्ली की सड़कों पर पूरे स्वाभिमान के साथ देश के हर एक जन की अगुवाई में खड़ा होगा।


आज आंदोलन को मिली सफलतायें - 

लखनऊ में राजभवन घेराव जाते किसान 

  • उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की सरकार द्वारा राजभवन घेराव कार्यक्रम पर रोक लगाए जाने के बावजूद भी सफल रहे कार्यक्रम।
  • जनपद सहारनपुर व हरिद्वार से घेराव करने देहरादून जा रहे किसानों को छुटमलपुर, ज्वालापुर, एवं डोईवाला में किसानों को रोके जाने पर किसानों ने देहरादून के दोनों बॉर्डर को बंद कर दिया। लगभग चार घंटे तक देहरादून के दोनों रास्ते बंद रहे। इसके बाद देहरादून से अधिकारियों ने आकर ज्ञापन लिया।
  • लखनऊ में पुलिस की पकड़ झगड़ के बावजूद भी गोसाईंगंज में हजारों किसान इकठ्ठा हुये। इसके बाद राज्यपाल भवन के लिए निकले। भारी पुलिस व्यवस्था के बावजूद भी पुलिस किसानों को नही रोक पायी। किसानों के एक प्रतिनिधि मंडल को ले जाकर राजभवन में राज्यपाल महोदय के बाहर होने के कारण विशेष सचिव को ज्ञापन दिया गया। 

जय जवान, जय किसान

भवदीय,

धर्मेंद्र मलिक 

राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी 

भारतीय किसान यूनियन 

Wednesday, January 20, 2021

प्रेस नोट - भारतीय किसान यूनियन ( 20-01-2021)





प्रेस नोट

(20-01-2021)

  

सरकार के साथ आज की बैठक सकारात्मक चौधरी राकेश टिकैत अगली बैठक 22 जनवरी 12:00 बजे विज्ञान भवन में होगी कल संयुक्त किसान मोर्चा की बैठक में सरकार के प्रस्ताव पर होगा फैसला

कल 11:00 बजे किसान परेड को लेकर दिल्ली पुलिस के साथ होगी बैठक|

आज 20 जनवरी को दसवें दौर की बैठक काफी सकारात्मक रही बैठक के शुरू होने पर कृषि मंत्री नरेंद्र तोमर ने कहा कि सरकार खुले मन से चर्चा को तैयार है और आप संशोधन पर चर्चा करें। इस पर किसान नेताओं ने कहा कि हम संशोधन पर नहीं बिल वापसी पर बात करानेआए हैं। अगर आपको इस पर चर्चा करनी है तो चर्चा करें, अन्यथा न्यूनतम समर्थन मूल्य पर बात करें ।इसके बाद संयुक्त मोर्चा के नेताओं ने एकमत होकर कृषि मंत्री जी को कहा कि एक तरफ आप समाधान ढूंढने की बात करते हैं और  दूसरी तरफ एनआईए हरियाणा पुलिस उत्तर प्रदेश पुलिस, उत्तराखंड पुलिस, और अन्य राज्यों के पुलिस के माध्यम से आंदोलनकारियों पर दबाव बनाने के लिए कार्यवाही कर रहे हो आंदोलन में मदद कर रहे लोगों को जो अपने आमदनी से कुछ बचा कर भावनात्मक रूप से दान कर रहा है उस पर राज्य के कलाकारों को गायको को , सामाजिक संगठनों को एनआईए के नोटिस भेज कर दबाव बना रहे हो ।जिस पर कृषि मंत्री नरेंद्र तोमर जी ने कहा की यह सब बातें हमारे संज्ञान में नहीं है आपकी पिछली बैठक में हुई बातचीत का संज्ञान लेकर गृह मंत्रालय से वार्ता की है । चर्चा के बाद अब कोई नोटिस नहीं जाएंगे, आपको जो नोटिस प्राप्त हुए हैं उनको हमें दिए जाएं।  4:00 बजे तक चर्चा के ब्रेक लिया गया।ब्रेक के बाद  दोबारा बैठक शुरू होने पर कृषि मंत्री नरेंद्र तोमर जी ने प्रस्ताव दिया कि हम इन बिलों को 2 साल तक के लिए स्थगित कर किसान और सरकार के प्रतिनिधियों की एक कमेटी का गठन कर सकते हैं। कमेटी बिल वह न्यूनतम समर्थन मूल्य पर चर्चा कर जो राय देगी उसी पर आगे का फैसला कर दिया जाएगा ।

सरकार के इस प्रस्ताव पर किसानों ने कहा कि कल आप के प्रस्ताव पर संयुक्त मोर्चा की बैठक में निर्णय कर आपको अवगत कराया जाएगा। सरकार के साथ अगली बैठक 22 जनवरी को 12:00 बजे विज्ञान भवन में होगी |

कल ट्रैक्टर परेड को लेकर 11:00 बजे दिल्ली पुलिस के साथ किसानों का एक प्रतिनिधिमंडल वार्ता करेगा इस विषय पर दिल्ली पुलिस के साथ आज भी चर्चा की गई है लेकिन उसमें कोई सहमति नहीं बन पाई थी|

भवदीय

धर्मेन्द्र मलिक

भारतीय किसान यूनियन

9219691168

Tuesday, January 19, 2021

धरना स्थल गाजीपुर बॉर्डर से आज की खबरें


गाजीपुर बॉर्डर पर उपस्थित किसानों की भीड़ 

आज आंदोलन का 55वां दिन हो चुका है। जैसे-जैसे दिन बढ़ते जा रहे है वैसे-वैसे आंदोलन बढ़ता जा रहा है। तीन काले कृषि कानूनों के विरुद्ध और न्यूनतम समर्थन मूल्य को कानून बनाने को लेकर देश भर से किसान आंदोलन से जुड़ रहे है। महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, बिहार, और उत्तर प्रदेश से हजारों किसान आज धरना स्थल पर पहुंचे और अपना तंबू गाड़ा गाजीपुर बॉर्डर पर। 

महाराणा प्रताप के पुण्यतिथि के अवसर पर गाजीपुर बॉर्डर पर महाराणा की प्रतिमा पर राकेश टिकैत जी ने पुष्पांजलि अर्पित की| 

बॉलीवुड के जानेमाने कलाकार सुशांत सिंह, गुल पनाग, पंजाबी गायक हर्ष चीमा, हरभजन मान, कंवर ग्रेवाल, सोनिया मान, इत्यादि गाजीपुर बॉर्डर पर पहुंच कर किसानों के संघर्ष को अपना समर्थन दिया। मंच से कलाकारों ने किसानों का हौसला अफजाई किया और उनके संघर्ष को सलाम किया|




धर्मेंद्र मलिक 
राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी  
भारतीय किसान यूनियन 

गाजीपुर बॉर्डर से राष्ट्रीय और क्षेत्रीय मीडिया में आज की खबरें -

  1. https://www.devdiscourse.com/article/headlines/1411854-farmers-not-against-any-party-but-centres-policy-rakesh-tikait
  2. https://www.google.com/amp/s/www.news18.com/amp/news/india/farmers-not-against-any-party-but-centres-policy-says-bku-chief-rakesh-tikait-3309065.html
  3. https://in.news.yahoo.com/farmers-not-against-party-centres-151044548.html
  4. https://www.google.com/amp/s/www.tribuneindia.com/news/nation/farmers-not-against-any-party-but-centres-policy-rakesh-tikait-200233
  5. https://timesofindia.indiatimes.com/india/farmers-not-against-any-party-but-centres-policy-rakesh-tikait/articleshow/80333480.cms
  6. https://youtu.be/fCb10gTmF3g
  7. https://youtu.be/CtvQgvswcdk
  8. https://youtu.be/BUDrTt5KECU 
  9. https://indianexpress.com/article/opinion/let-the-farmers-lead-7151460/?utm_source=whatsapp_web&utm_medium=social&utm_campaign=socialsharebuttons
  10. https://janchowk.com/beech-bahas/farmers-have-captured-the-neck-of-horse/
  11. https://in.news.yahoo.com/disappointed-sc-panel-stir-continue-180415399.html
  12. https://www.outlookindia.com/newsscroll/disappointed-with-sc-panel-stir-to-continue-till-laws-get-repealed-bku-leader-rakesh-tikait/2009380
  13. https://www.devdiscourse.com/article/headlines/1404143-disappointed-with-sc-panel-stir-to-continue-till-laws-get-repealed-bku-leader-rakesh-tikait 

Monday, January 18, 2021

महिलाओं ने संभाला किसान आंदोलनों का मोर्चा

गाजीपुर बॉर्डर पर मंच का संचालन करते हुए महिला किसान


गाजीपुर बॉर्डर पर 'महिला किसान दिवस' के अवसर पर महिलाओं ने मंच से लेकर आंदोलन की बागडोर संभाली|

पिछले 54 दिनों से किसान दिल्ली के सीमाओं पर तीन किसान विरोधी काले कानूनों का विरोध कर रहे है और MSP को कानून बनाने की मांग कर रहे है। सरकार के साथ 9 बार वार्ता हो चुकी है जिसका अभी तक कोई परिणाम नही निकला है। दूसरी तरफ कई भारतीय मीडिया चैनल किसानों के इस संघर्ष को खालिस्तानी, देश-विरोधी, और राजनैतिक साजिश होने का दावा करते आ रहे है। महिला, बुजुर्ग, एवं युवाओं के धरने में शामिल होने पे भी सवाल उठाया जा रहा है। अभी कुछ दिन पहले ही माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने भी अपने वक्तव्य में ये दर्शाया की महिलाओं, बुजुर्गो, और बच्चों को प्रोटेस्ट में रखा जा रहा है। 

अब सवाल ये उठता है कि महिलाएं जिनकी खेती में पुरुषों के बराबर या कहे ज्यादा योगदान होता है उनके किसान होने के अस्तित्व को ही नकार दिया गया। 

आज महिला किसान दिवस के अवसर पर सर्वोच्च न्यायालय और सरकार के अड़ियल रुख को आइना दिखाने के लिये 'महिला किसान दिवस' पर महिला किसानों ने गाजीपुर बॉर्डर पर हो रहे कृषि कानून विरोधी प्रदर्शन में ना सिर्फ मंच अपने हाथ मे लिया बल्कि 21 महिला किसानों ने भूख हड़ताल पे भी बैठी। 

महिला किसानों ने ये व्यक्त किया कि जिस तरह से समाज मे हमारे योगदान को नकार दिया जाता है उसी तरीके से आंदोलन को खड़ा करने और उन्हें चलाने में भी हमारे योगदान को नकारा जा रहा है। धरना स्थलों पर हमारी उपस्थिति खेती में हमारे योगदान को दर्शाती है। धरने में हापुड़ से आयी महिला किसान बबली सिंह ने कहा, "अभी तक तो हम खेतों और घरों में थे लेकिन सरकार के अड़ियल रवैये और हमारी पहचान पे सवाल उठने के बाद अब हम सड़कों पे भी होंगे। सर्वोच्च न्यायालय और सरकार को ये समझना होगा कि जितना एक पुरुष खेतों में काम करता है उससे कहीं ज्यादा औरतें खेतों पे काम करती हैं। धरना करने के लिए हमे किसी की ना तो परमिशन चाहिए ना ही सहयोग। महिला किसान आत्मनिर्भर है और आगे ऐसे किसी भी कृषि -किसान विरोधी कानूनों का विरोध करती रहेंगे।" 

एक दूसरी महिला किसान ने कहा, "अब ऐसा समय नही रह की महिलाएं अपने योगदान को आगे पहचान नही दिलायेंगी, अब महिलायें अपने काम को पहचान और अपना हक़ दोनों ले के रहेंगी। ये तीन काले कानून सिर्फ पुरुष किसानों का ही नुकसान नही करेंगी उसके साथ साथ हम महिला किसानों और हमारे बच्चों पर भी बुरा प्रभाव डालेंगी।"

26 जनवरी को होने वाली 'किसान ट्रैक्टर परेड" के विषय मे एक महिला किसान ने कहा, "जिस प्रकार से महिलायें 54 दिनों से इस आंदोलन में बढ़-चढ़ के हिस्सा ले रही है वैसे ही 26 जनवरी वाले परेड में महिलाएं को हाथ मे ट्रैक्टर की स्टीयरिंग होगी।"

आज दिन भर विभिन्न महिला किसानों प्रदर्शन स्थल पर पहुंचकर अपने देश के किसानों को समर्थन और सहयोग दिया। 

पंजाब से आयी महिलाओं ने आंदोलन को गर्म वस्त्र प्रदान करके आंदोलन का  समर्थन किया


हरियाणा, पंजाब, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, हिमाचल प्रदेश इत्यादि जगहों की करीब 7 युवा महिला कबड्डी टीम ने भी खेत-मिट्टी के खेल कबड्डी के आयोजन में हिस्सा लिया। साथ ही साथ बच्चियों ने दंगल का भी खेल दिखाया और योग किया| 

हरियाणा की युवा महिला कबड्डी टीम


हरियाणा युवा महिला कबड्डी टीम के कोच जगबीर सिंह जी जोकि खुद एक किसान है ने कहा, "हम यहां किसानों के समर्थन में आये है। ये जितनी भी लड़कियां है सब किसान परिवार से है।"

हरियाणा टीम की युवा खिलाड़ियों ने कहा कि वो सिर्फ यहां खेलने के मकसद से ही नही बल्कि ये भी बताना चाहती है किसानों के इस आंदोलन को समझती है और तीनों काले कानून को हटाने और MSP को कानून बनाने के लिये इसका समर्थन भी करती है।" 

आंदोलन में शामिल अन्य कई महिला किसानों ने एक साथ ये कहा कि "ये सिर्फ पुरुषों का आंदोलन नही है। पुरुषों की संख्या भले ही प्रदर्शन स्थल पे ज्यादा हो लेकिन महिला किसान ही है जो घरो और खेतों को संभाल रही है।"

आंदोलन के लंबा चलने पे महिला किसानों ने कहा, "हम हमेशा से ही धैर्य का प्रतिबिंब रहे है और जब तक सरकार तीनो काले कानूनों को वापस नही लेती हम डेट रहेंगे, दिल्ली की सीमाओं पे भी और गांवों, घरों, और खेतों पे भी।"

भारतीय किसान यूनियन हमेशा से महिला किसानों का सम्मान करती रही है। आंदोलन में उनकी भागीदारी हमारे संकल्प को और भी मजबूत बनाती है। 

राकेश टिकैत भूख हड़ताल पर बैठी महिला किसानों के साथ गाजीपुर बॉर्डर स्थित मंच पर

भारतीय किसान यूनियन 'महिला किसान दिवस' पर महिला किसानों के अलावा देश के सभी महिलाओं से इस संघर्ष में शामिल होने की आशा करती है क्योंकि किसान के बाद एक महिला ही होती है जिन्हें सब्जियों - अनाजों का असल मूल्य पता होता है। 

भारतीय किसान यूनियन की तरफ से महिला किसानों का सम्मान करते हुए


जय जवान, जय किसान!

धमेंद्र मलिक

राष्ट्रीय मीडिया इंचार्ज 

भारतीय किसान यूनियन

महिला किसान दिवस पर गाजीपुर बॉर्डर से अन्य सामचारों के लिंक निचे दिए गए है:        

Tuesday, June 2, 2020

सीजन 2020-21 खरीफ की फसलों की खरीद के लिए घोषित समर्थन मूल्य किसानों के साथ धोखा, यह समर्थन मूल्य कुल लागत (सी-2) पर घोषित नहीं :- चौ0 राकेश टिकैत

                                                                     प्रेस नोट
सीजन 2020-21 खरीफ की फसलों की खरीद के लिए घोषित समर्थन मूल्य किसानों के साथ धोखा, यह समर्थन मूल्य कुल लागत (सी-2) पर घोषित नहीं :- चौ0 राकेश टिकैत
पिछले पांच वर्षों की सबसे कम मूल्य वृद्धिः-भाकियू


भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता चौ0 राकेश टिकैत जी ने हाल में घोषित सीजन 2020-21 के लिए निर्धारित खरीफ फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य को किसानों के साथ धोखा बताते हुए कहा कि एक बार फिर सरकार ने महामारी के समय आजीविका के संकट से जूझ रहे किसानों के साथ भद्दा मजाक किया है। यह देश के भंडार भरने वाले और खाद्य सुरक्षा की मजबूत दीवार खडी करने वाले किसानों के साथ धोखा है। यह वृद्धि पिछले पांच वर्षों में सबसे कम वृद्धि है। सरकार ने कृषि विश्वविद्यालयों की लागत के बराबर ही समर्थन मूल्य घोषित नहीं किया है। किसानों को कुल लागत सी2 पर 50 प्रतिशत जोड़कर बनने वाले मूल्य के अलावा कोई मूल्य मंजूर नहीं है। सरकार महंगाई दर नियंत्रण करने के लिए देश के किसानों की बलि चढ़ा रही है। इसी किसान के दम पर सरकार कोरोना जैसी महामारी से लड़ पायी है। इस महामारी में खाद्य पदार्थों की आपूर्ति का नहीं मांग का संकट बना हुआ है। सरकार द्वारा धान का समर्थन मूल्य वर्ष 2016-17 में 4.3 प्रतिशत, 2017-18 में 5.4 प्रतिशत, 2018-19 में 12.9 प्रतिशत, 2019-20 में 3.71 प्रतिशत वृद्धि की गयी थी। वर्तमान सीजन 2020-21 में यह पिछले पांच वर्षों की सबसे कम 2.92 प्रतिशत वृद्धि है। सरकार द्वारा घोषित धान के समर्थन मूल्य में प्रत्येक कुन्तल पर 715 रुपये का नुकसान है। ऐसे ही एक कुन्तल फसल बेचने में ज्वार में 631 रुपये, बाजरा में 934रुपये, मक्का में 580 रुपये, तुहर/अरहर दाल में 3603 रुपये, मूंग में 3247 रुपये, उड़द में 3237 रुपये, चना में 3178 रुपये, सोयाबीन में 2433 रुपये, सूरजमुखी में 1985 रुपये, कपास में 1680 रुपये, तिल में 5365 रुपये का नुकसान है।
भारतीय किसान यूनियन सरकार से जवाब चाहती है कि आखिर इस वृद्धि के लिए कौन सा फार्मूला अपनाया गया। भारतीय किसान यूनियन किसानों से आह्वान करती है कि इस अन्याय के खिलाफ सामुहिक संघर्ष शुरू करें। भाकियू मांग करती है कि न्यूनतम समर्थन मूल्य को भी कानून बनाया जाए। न्यूनतम समर्थन मूल्य से कम पर खरीद करने वाले व्यक्ति पर अपराधिक धाराओं में मुकदमा दर्ज किया जाए।

Friday, May 8, 2020

गांव की सीमा पर मजदूरों के लिए भोजन-पानी व छाया में बैठने की व्यवस्था करें किसान- चौ0 राकेश टिकैत

किसानों की तरह खेतीहर मजदूर भी कृषि की रीढ़, घर लौट रहे प्रवासी श्रमिकों का उत्पीड़न बर्दाश्त नहींः- चौ0 राकेश टिकैत
गांव की सीमा पर मजदूरों के लिए भोजन-पानी व छाया में बैठने की व्यवस्था करें किसान:-भाकियू


भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता चौ0 राकेश टिकैत जी ने हजारों मील का पैदल सफर तय कर रहें मजदूरों के उत्पीड़न व परेशानी की खबरों से आहत होकर प्रशासन को चेताते हुए कहा कि पैदल साईकिल से अपनी मंजिल पर जा रहे प्रवासी श्रमिकों का उत्पीड़न बर्दाश्त नहीं होगा। चौ0 टिकैत ने किसानों से अपील करते हुए कहा कि किसान एवं मजदूर के समक्ष कोरोना के इस संकट के समय तबाही का एक नया दौर आ खड़ा हुआ है। ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि आधारित रोजगार न होने के कारण लोग अपने परिवार के भरण-पोषण के लिए पंजाब, हरियाणा, पश्चिमी उत्तर प्रदेश सहित अनेक राज्यों में खेतीहर मजदूर का कार्य कर रहें है। सरकार की उपेक्षा व गलत नीतियों के चलते आये दिन हजारों श्रमिक पंजाब से चलकर लखनऊ, गोण्डा, बस्ती, फर्रूखाबाद, महराजगंज के लिए गुजर रहे है। इन खेतीहर मजदूरों पर पूलिस का अत्याचार जारी है। जिसकी खबरें समाचार पत्रों के माध्यम से प्राप्त हो रही हैं। महामारी के कारण भूखे-प्यासे प्रवासी मजदूर बच्चों सहित अपने गांव की हजारों किलोमीटर दूरी की पैदल यात्रा पर निकले हैं।
मेरी किसानों व भारतीय किसान यूनियन के लोगो  से अपील है कि इन प्रवासी श्रमिकों के लिए अपने गांव की सीमा में भोजन पानी एवं छाया या रूकने की उचित व्यवस्था करायें। प्रवासी श्रमिकों को कैम्प में रोककर पैदल चल रहे लोगों की सूचना प्रशासन को देकर इनके लिए बसों की व्यवस्था कराना सुनिश्चित करें।
                                                                                                         

Friday, May 1, 2020

किसानों से गेंहू खरीद पर उतराई, छनाई व सफाई के नाम पर 20 रुपये काटे जाने पर भाकियू खफा, मुख्यमत्री को लिखा पत्र

माननीय,
श्री योगी आदित्यनाथ जी,
मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश सरकार, लखनऊ।

विषय- उत्तर प्रदेश में किसानों से गेंहू खरीद पर उतराई, छनाई व सफाई के नाम पर 20 रुपये न लिए जाने के सम्बन्ध में।

आदरणीय योगी जी
अवगत कराना है कि उत्तर प्रदेश में किसानों से गेंहू खरीद नीति में उतराई, छनाई व सफाई के नाम पर किसानों से 20 रुपये काटे जा रहे हैं। जो किसानों के साथ अन्याय है। इस वर्ष खराब मौसम के वजह से किसानों की पैदावार में काफी कमी आयी है। किसानों को पहले से ही उनकी लागत का लाभकारी मूल्य नहीं मिल पा रहा है। गेंहू का समर्थन मूल्य तय करते समय भी इस तरह की कोई शर्त नहीं रखी जाती है। मंडी कानून के तहत भी 3 रुपये लिए जाने का प्रावधान है वह भी उस स्थिति में, जब गेंहू की छनाई व तराजू से तुलाई की गयी हो।


वर्तमान में कम्प्यूटरीकृत कांटों से तुलाई व नवीन तकनीकी के थ्रेसर से कटाई के कारण सफाई की कोई आवश्यकता नहीं है। किसानों द्वारा उतराई का कार्य स्वयं किया जाता है। जिसके चलते मंडी कानून भी गौण हो जाता है। किसानों पर उतराई, छनाई व सफाई के नाम पर खरीद एजेन्सियों द्वारा परिवहन का शुल्क वसूला जा रहा है।
कृषि राज्य का विषय है अगर इस तरह का कोई भी खर्च खरीद एजेन्सियों को दिया जाता है तो उसकी धनराशि राज्य सरकार द्वारा जारी की जाए। खरीद एजेन्सियों का खर्च किसानों से लिया जाना किसान हित पर कुठाराघात है।
आपके आग्रह है कि गेंहू खरीद पर किसानों से लिए जाने वाले 20 रुपये प्रति कुन्तल का शुल्क अविलम्ब समाप्त किया जाए।