Thursday, July 22, 2010

बोआई के पहले ही तय करें फसल मूल्य भाकियू ने किया प्रदर्शन


बोआई के पहले ही तय करें फसल मूल्य


किसानों ने कलेक्ट्रेट पर पंचायत और

भाकियू ने किया प्रदर्शन

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अमर उजाला ब्यूरो

मिर्जापुर। भारतीय किसान यूनियन के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने कलेक्ट्रेट पर जोरदार प्रदर्शन किया। जिला कार्यालय पर एकत्रित कार्यकर्ता जुलूस की शक्ल में नारेबाजी करते हुए कलेक्ट्रेट पहुंचे। वक्ताओं ने कहा कि भारत एक कृषि प्रधान देश है। यहां की जनसंख्या प्रत्यक्ष और परोक्ष रूप से कृषि से जुड़ी है। अत्यधिक परिश्रम के बाद भी किसानों को उनकी उपज का वाजिब मूल्य नहीं मिल रहा है।

कलेक्ट्रेट पर पंचायत कर किसानों ने कहा कि फसल का मूल्य बोआई से पहले तय किया जाए। मूल्य तय करते समय स्वामीनाथन कमेटी की सिफारिशों को आधार मानकर 50 प्रतिशत मुनाफा जोड़कर दरें तय की जाए। देश की सभी फसलों का समर्थन मूल्य घोषित किया जाए। गेहूं और धान का समर्थन मूल्य 1500, आलू का 500 और दलहन तथा तिलहन का समर्थन मूल्य 6500 रुपये घोषित किया जाए। गन्ना किसानों के समस्त बकायों का भुगतान करने के साथ और उसका समर्थन मूल्य कम से कम 350 रुपये कुंतल किया जाए। कहा कि रकबे के आधार पर किसानों को उनके खाते में उर्वरक पर सीधे सब्सिडी दी जाए।

भाकियू के जिलाध्यक्ष अली जमीर खां ने कहा कि बाण सागर नहर परियोजना को तृतीय चरण में जरगो बांद से हुसैनपुर बीयर तक जोड़ा जाए। नहरों की सफाई कराकर मरम्मत कराई जाए और टेल तक पानी पहुंचाने की व्यवस्था हो। जिला महासचिव राम आसरे सिंह ने कहा कि मिर्जापुर जिले की खेती बरसात पर निर्भर है। किसान भदई फसल नहीं उगा पा रहे हैं और खरीफ के लिए नर्सरी नहीं डाल पा रहे हैं। किसानों का कृषि संबंधित ऋण माफ किया जाए। इस मौके पर जिलाध्यक्ष अली जमीर खां, राम आसरे सिंह, राजेंद्र प्रसाद सिंह, डा. राम सागर सिंह, प्रहलाद सिंह, वीरेंद्र सिंह, सिद्धनाथ सिंह, पन्नर सिंह, धर्मदेव उपाध्याय, छविनाथ सिंह, उदयनाथ मिश्र, पंचम सिंह, हरिवंश सिंह, सुरेश सिंह, गोपाल सिंह, दासू यादव आदि थे।

सौ धान और गेहूं का समर्थन मूल्य करने की मांग

जुलूस की शक्ल में पहुंचे कार्यकर्ता

स्वामीनाथन कमेटी की सिफारिशों को लागू करने की मांग

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