Showing posts with label lucknow. Show all posts
Showing posts with label lucknow. Show all posts

Friday, August 4, 2017

Ch. Naresh Tikait meet CM Yogi adityanath


भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय अध्यक्ष चौ0 नरेश टिकैत जी के नेतृत्व में भाकियू के प्रतिनिधिमंडल ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ के आवास 5 कालिदास मार्ग पर भेंट कर किसानों की समस्याओं पर चर्चा कर समाधान किये जाने की मांग करते हुए कहा कि प्रदेश में कानून व्यवस्था से लेकर किसान समस्याओं पर संतोषजनक कार्य नहीं हो पा रहा है। गन्ना भुगतान एवं ब्याज, आलू की खरीद, धान खरीदने की शत-प्रतिशत व्यवस्था, जंगली जानवरों से हो रहे नुकसान, रंगराजन कमेटी आदि पर विस्तृत चर्चा की। किसानों की समस्याओं पर गौर करते हुए मुख्यमंत्री महोदय ने आश्वासन दिया कि किसानों की इच्छा के विरूद्ध प्रदेश में रंगराजन कमेटी की रिपोर्ट लागू नहीं होगी। किसानों से शत-प्रतिशत धान खरीद की जायेगी। जंगली जानवरों एवं पालतू पशुओं से किसानों की फसल की सुरक्षा हेतु आवश्यक इंतजाम एवं चारागाह की जमीन कब्जामुक्त कराकर पशुशालाओं का निर्माण कराया जाऐगा। किसानों की कर्जमाफी पर पुनर्विचार किये जाने का भी आश्वासन दिया गया। कोल्ड स्टोरेज सम्बन्धित किराया तय करने की धारा 29 को समाप्त करने एवं आलू का निर्यात पर परिवहन सब्सिडी व ग्रेडिंग खत्म करने का आश्वासन दिया। वार्ता में राजेश चौहान, दीवानचंद चौधरी, बलराम लम्बरदार, राजपाल शर्मा, राजवीर सिंह जादौन, केतकी सिंह, हरनाम सिंह वर्मा, धर्मेन्द्र मलिक मौजूद रहे।




ज्ञापन
माननीय,
श्री योगी आदित्यनाथ जी,
मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश सरकार,
लखनऊ।
आदरणीय श्री योगी जी
प्रदेश में भाकियू हमेशा किसानों के लिए संघर्ष करती रही है। प्रदेश की जनसंख्या का 65 प्रतिशत हिस्सा प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से कृषि से जुड़ा है। किसान के अत्यधिक परिश्रम के बाद भी उसको उसकी मेहनत के अनुसार लाभ नहीं मिल पाता। किसानों पर कर्ज का भार बढ़ता जा रहा है, एन0एस0एस0ओ0 की रिपोर्ट के अनुसार अगर कोई दूसरा धंधा मिले तो 50 प्रतिशत किसान खेती छोडने को तैयार है। प्रदेश के किसानों की समस्याओं की सूची लम्बी होती जा रही है।
प्रदेश का किसान मानसून की विफलता, सूखा, फसल उत्पादन में प्रयोग होने वाले उत्पादों की कीमतों में वृद्धि और फसलों के मूल्य में गिरावट, ऋण का अत्यधिक बोझ आदि परिस्थितियों के कारण संकट में है। आपकी सरकार ने 36,359 करोड़ रुपये का ऋण माफ कर किसानों को राहत दी है। भाकियू इसका स्वागत करती है। आज दिनांक 31.07.2017 झूलेलाल पार्क, लखनऊ में आयोजित किसान पंचायत के माध्यम से निम्न मांग करती है। किसानों की मुख्य मांगे निम्नलिखित है-
1. फसलों का लाभकारी मूल्य-डॉ0 स्वाममीनाथन रिपोर्ट को लागू किया जाये और किसानों को फसल लागत मूल्य से 60 प्रतिशत अधिक न्यूनतम समर्थन मूल्य देने का फॉर्मूला तुरंत लागू किया जाए। फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य से नीचे की खरीद को अपराध माना जाये। सभी मुख्य फसलों, फलों, सब्जी व दूध को न्यूनतम समर्थन मूल्य के आधीन लाया जाए।
प्रदेश के आलू किसानों की पैदावार लागत 800 रूपये प्रति कुन्तल है। आलू का समर्थन मूल्य 1000 रूपये प्रति कुन्तल तय किये जाने एवं ग्रेडिंग समाप्त किये जाने की आवश्यकता है। धारा-29 को समाप्त करते हुए सरकार कोल्ड स्टोर का किराया तय करने का अधिकार अपने पास सुरक्षित करे। किसान हित में आलू का निर्यात कराया जाय।
धान खरीद हेतु समुचित क्रय केन्द्रों की स्थापना की जाय एवं प्रदेश के सभी किसानों शत-प्रतिशत धान खरीद की जाय।
2. गन्ना- प्रदेश के गन्ना किसानों का बकाया भुगतान अविलम्ब कराया जाए। पिछली सरकार गलत तरीके से तीन सत्रों का गन्ना भुगतान पर मिलने वाला ब्याज गलत तरीके से माफ कर दिया गया था। सरकार के आदेश को उच्च न्यायालय इलाहाबाद द्वारा निरस्त कर दिया गया है। किसानों को ब्याज का भुगतान कराया जाए।
प्रदेश सरकार के पास केवल गन्ने की फसल मूल्य तय करने का अधिकार है सरकार को यह समाप्त नहीं करना चाहिए। प्रदेश में रंगराजन कमेटी की सिफारिश को लागू नहीं किया जाय।
3. ऋण- प्रदेश सरकार द्वारा की गई ऋण माफी का भारतीय किसान यूनियन स्वागत करती है। सरकार द्वारा जो ऋण माफी की गई है वह पर्याप्त नहीं है। भाजपा की चुनावी घोषणा के अनुसार सभी किसानों का पूर्णतः घोषणा की तारीख तक का कर्ज माफ किया जाय। फसली ऋण ही नहीं सभी तरह के कृषि ऋण शामिल किये जायें।
खरीफ का ऋण वितरण 1 अप्रैल से 31 अगस्त तक और रबी का ऋण 1 सितम्बर से 31 मार्च तक होता है। किसान को खरीफ व रबी फसली ऋण एक साथ दिया जाए। फसली श्रण का एक चौथाई हिस्सा कृषि आदान के रूप में क्रय करने की अनिवार्यता समाप्त की जाए।
4. बिजली- डार्क जोन में किसानों को निजी नलकूपों के ऊर्जीकरण पर गलत तरीके से लगाये गये प्रतिबन्ध को समाप्त करते हुए किसानों को निजी नलकूप के कनेक्शन जारी किया जाए। किसानों के नलकूप से पूरे प्रदेश में 5 हॉर्स पावर का बिल लिया जाय। सामान्य योजना में किसानों को दी जाने वाली सब्सिडी बढ़ाई जाय। किसानों की लाइन 300 से घटाकर 190 मीटर किये जाने के आदेश को समाप्त किया जाय।
5. भूमि अधिग्रहण- प्रदेश के विभिन्न जनपदों जैसे-कानपुर जनपद की घाटमपुर तहसील के गांव लौहरीमऊ सहित 8 गांव की जमीन नवेली पावर प्लांट हेतु अधिग्रहण की गयी है। जनपद अम्बेड़करनगर के बुद्ध परिपथ, जनपद कानपुर के बिल्लौर क्षेत्र में लखनऊ एक्सप्रेस-वे, कानपुर में रेलवे फ्रंट कॉरिडोर, मेरठ में मेरठ विकास प्राधिकरण, मुजफ्फरनगर-सहारनपुर में रेलवे फ्रंट कॉरिडोर के भूमि अर्जन में किसान लम्बे समय से आंदोलनरत् है। ललितपुर पावर प्लान्ट सहित सभी सम्बन्धित जनपदों के जिलाधिकारी को निर्देशित कर किसानों के साथ वार्ता कर विवादों का समाधान कराया जाए। सभी विवादित अधिग्रहण पर वर्तमान कानून के आधार पर 04 गुना मुआवजा दिलाया जाय।
6. सिंचाई- प्रदेश में नई नहरों के निर्माण एवं चौगामा नहर परियोजना व बुंदेलखण्ड पंचनदा बांध परियोजना को अविलम्ब पूरा किया जाए।
नहरों के पानी टेल तक पहुंचाने व टेल के किसानों के सम्पर्क नम्बर रखने व उस पर सम्पर्क कर कृषकों से यह सुनिश्चित करने की टेल तक पानी पहुंच रहा है, की कारगर व्यवस्था की जाए एवं प्रदेश के नहरों व बाँधों में जमा सिल्ट को साफ कराया जाय।
7. कृषि वार्निकी- कृषि वार्निकी के अन्तर्गत किसानों द्वारा पॉपलर, सागौन, यू० के० लिप्टिस की खेती की जा रही हैं। किसानों का उत्पीड़न मण्ड़ी समिति व वन विभाग द्वारा किया जा रहा हैं। कृषि वार्निकी के अन्तर्गत आने वाले सभी वृक्षों पर सभी जनपदों में कटाई एवं ढुलाई पर लगाये गये प्रतिबन्ध को समाप्त करते हुए मण्ड़ी शुल्क भी समाप्त किया जायें। मेंथा की खेती किसानों की नकदी फसल है। मेंथा को फसल का दर्जा देते हुए मण्ड़ी शुल्क समाप्त किया जायें।
8. बुंदेलखण्ड-पिछले 10 वर्षो से बुन्देलखण्ड के किसान सूखा व असमय बारिश की मार झेल रहे है, जिससे किसानों पर कर्ज का बडा भार हो गया है। आये दिन बुन्देलखण्ड में किसानों द्वारा आत्महत्या की जा रही है। बुंदेलखंड के किसानों का पलायन रोकने एवम आजीविका के संकट के समाधान हेतु एक संयुक्त समिति का गठन किया जाए। बुन्देलखण्ड़ के किसानों के सभी कर्ज माफ किये जायें।
9. प्रदेश में आवारा पशुओं जैसे नीलगाय, जंगली सुअर आदि के द्वारा किसानों की फसलों को नष्ट किया जा रहा है। सरकार द्वारा इसकी रोकथाम हेतु आवश्यक कार्यवाही की जाये। बुंदेलखण्ड में अन्ना प्रथा पर कानूनी प्रतिबंध लगाया जाए।
10. मुकदमें- आन्दोलन के दौरान किसानों पर सभी मुकदमे वापस लिये जाये। जनपद कुशीनगर एवं फैजाबाद,कानपुर, हमीरपुर में किसानों पर लगाये गये झूठे मुकदमे समाप्त किये जाएं। जेल में बंद किसानों को रिहा किया जाए।
11. किसान आय आयोग का गठन करते हुए किसानों की भागीदारी सुनिश्चित की जाए।
12. प्रदेश में समान शिक्षा सामान्य पाठ्यक्रम लागू करके एक तरह की शिक्षा व्यवस्था लागू किया जाय। प्रदेश में सभी को समान चिकित्सा सुविधा उपलब्ध करायी जाय।
13. प्रदेश के पात्र व्यक्तियों के राशन कार्ड नहीं बन पा रहे हैं इसकी जांच कराकर राशन कार्ड उपलब्ध कराये जायें।
14. प्रदेश में किसानों को पेंशन दी जाय और सभी तरह की पेंशन जैसे विधवा, वृद्धा के बहुत सारे पात्र बजट न होने के कारण इस सुविधा से वंचित रह जाते हैं। इसमें बजट बढ़ाया जाय।

Saturday, May 2, 2015

किसानों की समस्याओं पर कमेटी गठित करने का माननीय मुख्यमंत्री जी ने दिया आश्वासन-भाकियू

                                                              प्रेस नोट
किसानों की समस्याओं पर कमेटी गठित करने का माननीय मुख्यमंत्री जी ने दिया आश्वासन-भाकियू
आज भारतीय किसान यूनियन के 9 सदस्यीय प्रतिनिधि मण्डल ने चैधरी राकेश टिकैत जी के नेतृत्व मंे माननीय मुख्यमंत्री जी से उनके आवास 5 कालीदास मार्ग पर किसान समस्याआंे को लेकर वार्ता की। वार्ता में दिवान चन्द चैधरी राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, राजेश सिंह चैहान प्रदेश अध्यक्ष, विजेन्द्र सिंह यादव, हरिनाम सिंह वर्मा जिलाध्यक्ष लखनऊ, धर्मेन्द्र मलिक प्रवक्ता, राजवीर सिंह जादौन प्रभारी बुन्देलखण्ड, दिनेश दुबे, सरदार गुरमीत सिंह, मुकेश सिंह प्रदेश महासचिव शामिल रहे। भाकियू  नेताओं ने माननीय मुख्यमंत्री जी को 19 सूत्रीय मांग पत्र दिया जिस पर मुख्यमंत्री जी ने कहा कि आपके मांगपत्र के अनुसार प्राकृतिक आपदा पर नीति बनाने, प्रदेश में किसानों की आत्महत्या, फसलांे की लागत और मूल्य, राजस्व के पुराने कानूनों में परिवर्तन को लेकर जल्द ही इन विषयों पर कमेटी गठित किये जाने का कार्य किया जायेगा। जिसमें भारतीय किसान यूनियन के प्रतिनिधियों को भी शामिल किया जायेगा। कमेटी द्वारा जो सिफारिशें की जायेगी उ0प्र0 सरकार उन्हें लागू करने का कार्य करेगी। मुख्यमंत्री जी ने जल्द ही इन विषयों पर बैठक करने का भी आश्वासन दिया।
भवदीय

(धर्मेन्द्र मलिक)
प्रवक्ता

श्री अखिलेश यादव जी से वार्ता करते भाकियू प्रवक्ता श्री राकेश टिकैत जी 


                                                                                       मांग पत्र
माननीय,
श्री अखिलेश यादव जी,
मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश सरकार,
लखनऊ।
मान्यवर,
प्रदेश में भाकियू हमेशा किसानों के लिए संघर्ष करती रही है। प्रदेश की जनसंख्या का 70 प्रतिशत हिस्सा प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से कृषि से जुड़ा है। किसान के अत्यधिक परिश्रम के बाद भी उसकों उसकी मेहनत के अनुसार लाभ नहीं मिल पाता है। एक सर्वे के अनुसार किसानों की मासिक आमदनी मात्र तीन हजार रुपये के आसपास है। ऐसी परिस्थितियों में किसानों पर कर्ज का भार बढ़ता जा रहा है। जिससे प्रत्येक वर्ष 4 से 6 प्रतिशत के बीच किसान खेती छोडकर किसान से खेतीहर मजदूर बन रहे है। एन0एस0एस0ओ0 की रिपोर्ट के अनुसार अगर कोई दूसरा धंधा मिले तो 50 प्रतिशत किसान खेती छोडने को तैयार है। युवाओं का खेती से मोह भंग हो रहा है। जिसका मुख्य कारण है कि किसानों को उनकी उपज का उचित लाभकारी मुल्य न मिलना। आपके नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार ने वर्ष 2015 को किसान वर्ष मनाने का निर्णय लिया है। यह निश्चित तौर पर उत्तर प्रदेश सरकार का सराहनीय और स्वागत योग्य कदम है। भारतीय किसान यूनियन सरकार के इस फैसले का स्वागत करती है। उत्तर प्रदेश के किसानों से सम्बंधित विषयों पर आज दिनांक 27 अप्रैल 2015 को माननीय मुख्यमंत्री जी से वार्ता मंे निम्न समस्याओं के समाधान की मांग करती है।
1.  प्रदेश में असमय बारिश और ओलावृष्टि से हुई किसानों की फसलों की क्षति-पूर्ति हेतु उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा जो कदम उठाये गए है। भारतीय किसान यूनियन उसका स्वागत करती है। प्रदेश के लगभग 25 जनपदों में प्राकृतिक आपदा से किसानों की फसलें पूर्णतः नष्ट हुई है। दूसरे अन्य जनपदों में किसानों की फसलों का 50 से 70 प्रतिशत तक का नुकसान  हुआ है। फसलें बर्बाद होने से किसानों को दिल के दौरे पडने से मौत का सिलसिला रूक नहीं पा रहा है। ऐसी स्थिति में किसानों के सामने आजीविका एवं कर्ज चुकाए जाने का संकट खडा हो गया है। जिससे हताश होकर कुछ किसानों ने भी मौत को गले लगा लिया है। किसानों को कृषि निवेश एवं मजदूरी के सापेक्ष राहत दिये जाने हेतु प्रति एकड़ 25 हजार रुपये मुआवजा दिया जाए। एक वर्ष तक के बिजली के बिल व उत्तर प्रदेश सरकार के आधीन कर्ज देने वाली संस्थाओं के किसानों के कर्ज पर ब्याज माफ किया जाए। किसानों के अग्रिम एक वर्ष तक सभी देयों की वसूली पर रोक लगायी जाए। 
2.  प्रदेश में प्राकृतिक आपदा से किसानों की फसलों का मुआवजा दिये जाने हेतु कोई नीति नहीं है। किसानों की फसलों को हुई हानि का मुआवजा दैवी आपदा से दिया जाता है। जिसमें मुआवजे की राशि बेहद कम होती है। कई बार किसानों को मिलने वाली धनराशि इतनी कम होती है कि जिससे मुआवजा राशि उपहास की स्थिति में आ जाती है। इसके लिए एक कमैटी का गठन कर प्रदेश स्तर पर इससे निपटने हेतु नीति बनाई जाए तथा प्रदेश में इस तरह की आपदा से निपटने हेतु एक आकस्मिक निधि भी बनायी जाए। 
3.  फसलों की बर्बादी के कारण सदमे व खुदखुशी के कारण हुई किसानों की मौत के परिवार वालों को 25 लाख रुपये मुआवजा व परिवार के एक सदस्य को नौकरी दी जाए। 
4.  गन्ना उत्तर प्रदेश की फसल ही नहीं बल्कि किसान राजनीति का भी केन्द्र बिन्दु है। गन्ना किसानों का बकाया भुगतान ब्याज सहित अविलम्ब कराया जाए। 
5.  किसान दुर्घटना बीमा में कृषि करने वाले परिवार के सदस्यों को भी बीमा योजना में शामिल किया जाए। किसानों के स्वीकृत सभी दावों का भुगतान अविलम्ब कराया जाए। स्वीकृत दावों का भुगतान न करने वाली कम्पनियों के विरूद्ध के विरूद्ध रिकवरी जारी की जाए। 
6.  प्रदेश में स्थित ब्लाॅक का एक बड़ा हिस्सा डार्क जोन की श्रेणी में आने के कारण किसानों को निजी नलकूप के कनेक्शन नहीं मिल पा रहे है। जिससे किसानों का कृषि कार्य करना सम्भव नहीं हो पा रहा है। इस मुद्दे पर विस्तृत चर्चा कर किसानों को कनेक्शन दिये जाने का उपाय अविलम्ब किये जाए।
7. किसानों द्वारा राष्ट्रहित में कृषि कार्य किया जाता है। मौजूदा स्थिति में यह व्यवसाय संकट के भयानक दौर से गुजर रहा है। किसानों से बिजली बिल फिक्स रूप से 7.5 हाॅर्स पाॅवर का वसूल किया जाए। 
8.  सामान्य योजना के अन्तर्गत स्वीकृत निजी नलकूप के कनेक्शन का सामान अविलम्ब उपलब्ध कराया जाए। 
9.  ग्रामीण क्षेत्रों में 8 घंटे दिन व 8 घंटे रात्रि में विद्युत आपूर्ति की जाए। 
10.  पिछले 10 वर्षो से बुन्देलखण्ड के किसान सूखा व असमय बारिश की मार झेल रहे है। जिससे किसानों पर कर्ज का बडा भार हो गया है। आये दिन बुन्देलखण्ड से किसानों की आत्महत्या की खबरे आती रहती है। बुन्देलखण्ड में किसानों का उत्पीडन चरम सीमा पर है। बुन्देलखण्ड की समस्या के समाधान हेतु भारत सरकार पर दबाव बनाकर किसानों के निजी व सरकारी सभी कर्ज पूर्णतः माफ किये जाए। 
11. लघु सिंचाई योजना में निःशुल्क बोरिंग योजना, मध्यम गहरे बोरिंग, गहरे बोरिंग में अंशदान बढ़ाकर डेढ लाख रुपये प्रति बोरिंग किया जाए तथा उर्जीकरण का पैसा भी बढ़ाया जाए।
12. प्रदेश में सिंचाई हेतु नई नहरे व बांध बनाए जाए। चैगामा नहर परियोजना को चालू किया जाए।
13. प्रदेश में आवारा पशुओं जैसे नीलगाय, जंगली सुअर आदि के द्वारा किसानों की फसलों को नष्ट किया जा रहा है। सरकार द्वारा इसकी रोकथाम हेतू आवश्यक कार्यवाही की जाये। 
14. प्रदेश में जैव परिवर्तित (जी0एम0) फसलों के परीक्षण पर रोक लगायी जाये। 
15.  आन्दोलन के दौरान किसानों पर सभी मुकदमें वापस लिये जाये।
16. उत्तर प्रदेश में आसपास के प्रदेशों से यूरिया के दाम 50/- रुपये ज्यादा है। प्रदेश में यूरिया के दाम कम किये जाये। 
17. प्रदेश में चार कृषि विश्वविद्यालय होने के बावजूद भी उत्तर प्रदेश हरियाणा और पंजाब में स्थापित नस्लों के बीजों      की ही उपलब्धता है। प्रदेश में उन्नत बीज क्षेत्र में गम्भीरता से काम किया जाये।
18. प्रदेश में चकबन्दी कार्यो में तेजी लायी जाये तथा एक समय में एक गांव की चकबंदी समाप्त करने के बाद ही दूसरे      गांव में चकबंदी की प्रक्रिया प्रारम्भ की जाये। किसी भी गांव में चकबंदी शुरू करने से पहले उसकी समय सीमा  तय की जाए। विभाग में व्याप्त भ्रष्टाचार को समाप्त किया जाये।
19. प्रदेश में किसानों की आत्महत्या, कर्ज, कृषि विपणन्न, खरीद, फसलों की लागत और मूल्य, बुन्देलखण्ड के किसानों की वर्तमान स्थिति और समाधान, किसानों से सम्बंधित पुराने कानूनों में सुधार आदि मुद्दों पर उच्च स्तरीय कमैटी का गठन किया जाए। जिसमें किसान प्रतिनिधियों को भी शामिल किया जाए। कमैटी की रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद सरकार द्वारा उचित कार्यवाही की जाए। 
भवदीय 

चै0 राकेश टिकैत श्री दीवान चन्द चैधरी श्री राजेश सिंह चैहान
(राष्ट्रीय प्रवक्ता)                         (राष्ट्रीय उपाध्यक्ष भाकियू)                        (प्रदेश अध्यक्ष)
   भाकियू                                                     भाकियू

Tuesday, June 25, 2013

बढ़ी बिजली दरों के खिलाफ प्रदेश व्यापी आन्दोलन शीघ्र - भा0कि0यू0

प्रकाशनार्थ
प्रदेश सरकार कर रही है किसानों की अनदेखी - टिकैत
बढ़ी बिजली दरों के खिलाफ प्रदेश व्यापी आन्दोलन शीघ्र - भा0कि0यू0

आज दिनांक 25.06.2013 को भा0कि0यू0 के राष्ट्रीय प्रवक्ता चौधरी राकेश टिकैत व प्रदेश अध्यक्ष दीवान चन्æ चौधरी ने प्रदेश कार्यालय पर संवाददाता सम्मेलन को संयुक्त रूप से सम्बोधित करते हुए कहा कि राज्य सरकार द्वारा असंवैधानिक तरीके से प्रदेश के लगभग 10 लाख किसानों व 44 लाख ग्रामीण जनता को बिजली दरों में 35 से 45 प्रतिशत तक की वृद्धि की है जो पूरी तरह से गलत है। राज्य सरकार द्वारा शीघ्र ही जनता को राहत न दी गयी तो भा0कि0यू0 द्वारा अगले माह की 21 तारीख को सभी जिला मुख्यालयों  पर विधुत दरों में की गयी बढ़ोत्तरी के खिलाफ बड़ा आन्दोलन किया जायेगा। वर्तमान में राज्य सरकार द्वारा किसानों को 5 से 6 घण्टे विधुत आपूर्ति की जा रही है, जबकि पूर्व वर्षो मेें  14-15 घण्टे विधुत आपूर्ति मिल रही थी। ऐसे में आपूर्ति घटाकर बिजली की दरोें में बढ़ोतरी पूरी तरह गलत है। बिजली दर बढ़ाकर प्रदेश सरकार किसानों से लगभग 400 करोड़ ज्यादा राजस्व कमाना चाहती है जिसके मंशूबों को कामयाब होने नहीं दिया जायेगा। सरकार अपने चुनावी घोषणा-पत्र के अनुसार वादा
निभाये और किसानों को मुफत बिजली   दे । साथ ही लगाये गये 3.70 प्रतिशत सरचार्ज को तुरन्त वापस ले।
चौधरी टिकैत ने यह भी कहा कि लोहिया के आदर्शो पर चलने वाली और अपने आपको किसान हितैषी बताने वाली समाजवादी पार्टी सरकार के शासनकाल में किसानों की सबसे ज्यादा अनदेखी की जा रही है। सपा के घोषणा'-पत्र में चुनाव से पूर्व किसानों को फ्री बिजली, पानी, किसानों के      रू0 50,000.00 तक की ऋण माफी किसान आयोग का गठन, किसान हितैषी जैसी कृषि नीति जैसे - लोक लुभावने वादे किये गये थे लेकिन सत्ता में आने के बाद सरकार द्वारा किसानों के कल्याण के लिए सोंचना भी बन्द कर दिया गया है। पूर्व की सरकार द्वारा आयोजित कराये जा रहे जिला स्तर पर किसान दिवस को भी बन्द कर दिया है। भा0कि0यू0 प्रदेश अध्यक्ष दीवान चन्æ चौधरी एवं माननीय मुख्यमंत्री जी से पूर्व में भा0कि0यू0 प्रतिनिधि मण्डल की दो बार वार्ता में किसानों के सम्बन्ध में कुछ मुददों पर हुर्इ सहमति को भी लागू नहीं किया गया है। सरकार द्वारा हर वर्ग से किये गये वादों को पूरा किया जा रहा है लेकिन सरकार किसानों के मुददों पर खामोश है। भा0कि0यू0 जल्द ही लखनऊ मंें एक बड़ी किसान पंचायत के माध्यम से किसानों से ''वादा निभाओ आन्दोलन की शुरूआत करेगी। आज की प्रेस वार्ता में उत्तर प्रदेश राज्य विधुत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष श्री अवधेश कुमार वर्मा ने बिजली की बढ़ी दरों के खिलाफ चलाये जा रहे आन्दोलन का समर्थन किया। आज की प्रेस वार्ता में प्रमुख रूप से चौधरी राकेश टिकैत (राष्ट्रीय प्रवक्ता) दीवान चन्æ      चौधरी प्रदेश अध्यक्ष (उ0प्र0)घनश्याम वर्मा, अवधेश वर्मा,  मुकेश सिंह, बाराबंकी जिलाध्यक्ष श्री रामकिशोर पटेल तथा लखनऊ के जिलाध्यक्ष श्री हरिनाम सिंह वर्मा व भा0कि0यू0 के समस्त जिलों के जिलाध्यक्ष व पदाधिकारी मौजूद थे।

Monday, April 8, 2013

गन्ना किसानों का 1000 करोड़ का एक हफ्ते में भुगतान होगा, गन्ना आयुक्त ने दिया आश्वाशन .. भाकियू



गन्ना किसानों का 1000 करोड़ का एक हफ्ते में भुगतान होगागन्ना आयुक्त ने दिया आश्वाशन .. भाकियू

                आज दिनांक 08.04.2013 को भारतीय किसान यूनियन द्वारा गन्ना आयुक्त कार्यालय पर किसान पंचायत का आयोजन किया गया जिसमें विभिन्न जनपदों से आये किसानों एवं किसान प्रतिनिधियों ने अपने जनपद की समस्याओं से अवगत कराया। पंचायत का मुख्य मुद्दा उत्तर प्रदेष के गन्ना किसानों का लगभग 6000 करोड रूबकाया गन्ना मूल्य भुगतान रहा। पंचायत में षीतगृहों के मालिकों द्वारा मनमाने तरीके से किराये में वृद्धि करनेकिसानों के 50 हजार तक के ऋण माफ किये जानेकिसानों को निजी नलकूप के कनेक्सन दिये जाने, परदेश  में जिला स्तर पर किसान पंचायत आयोजित कराने तथा गेहूॅ के किसानों को 200 रूप्रति कुबोनस दिये जाने आदि से सम्बन्धित मांग पत्र गन्ना आयुक्त महोदय को दिया गया।
 गन्ना भवन लखनऊ में धरने पर चौ .राकेश टिकैत 

 भाकियू के मांग पत्र पर विचार करने के उपरान्त गन्ना आयुक्त महोदय द्वारा भाकियू के एक प्रतिनिधि मण्डल को वार्ता के लिए आमंत्रित किया गया। गन्ना आयुक्त कार्यालय में लगभग 2 घण्टे चली बैठक में निम्न बिन्दुओं पर सहमति व्यक्त की गयी जिसकी घोषणा  गन्ना आयुक्त0प्रद्वारा किसानों के बीच पंचायत स्थल पर पहुॅचकर की गयीः-
भाकियू के धरने को संबोधित करते गन्ना आयुक्त 
1-             एक सप्ताह में एक हजार करोड गन्ना मूल्य तथा षेश गन्ना मूल्य का नियमानुसार भुगतान कराने का प्रयास किया जायेगा।
2-            गन्ना मूल्य से बिना सहमति के विकास आदि के नाम पर किसी भी प्रकार की कटौती नहीं की जायेगी।
3-            टैगिंग आदेष का पुनर्मूल्यांकन किया जायेगा।
4-            टैंिगग आदेष में चीनी के अतिरिक्त अन्य सह-उत्पादों को सम्मिलित किये जाने हेतु षासन को प्रस्ताव भेजा जायेगा।
5-            चीनी मिल सरदारनगर पर अवषेश गन्ना मूल्य के भुगतान के सम्बन्ध में नियमानुसार यथा सम्भव जो भी कार्यवाही की जा सकेगीकी जायेगी। यथा आवष्यकता भारतीय किसान यूनियन के प्रदेष अध्यक्ष द्वारा नामित पदाधिकारियों के साथ 15 दिन पर बैठक की जायेगी।
6-            नई चीनी प्रोत्साहन नीति के अन्तर्गत जालौन/बुन्देलखण्ड  क्षेत्र में नई चीनी मिल लगवाने हेतु यथा सम्भव प्रयास किये जायेंगे।
                किसानों की दूसरी समस्याओं पर विचार किये जाने हेतु  कृषि  उत्पादन आयुक्त एवं प्रमुख सचिव कृषि  के दिल्ली होने के कारण वार्ता नहीं हो पायी। इस सम्बन्ध में तय किया गया कि किसानों से सम्बन्धित सभी विभागों के प्रमुख सचिव के साथ कृशि उत्पादन आयुक्त की अध्यक्षता में अगले सप्ताह बैठक आयोजित कर किसानों की समस्याओं का समाधान कराया जायेगा।गन्ना आयुक्त ने किसानो से धरने को समाप्त करने का आगर्ह करते हुए कहा की यह किसानो के काम का बहुत व्यस्त समय है । मै आपसे किये गए वादे को लागु करूगा ...
गन्ना आयुक्त के निवेदन को मानते हुए किसानो की तरफ से भाकियू के श्री राजेश चोहान ने धरना समाप्त किये जाने की घोषणा की । 


                प्रतिनिधि मण्डल में भारतीय किसान यूनियन के श्री राजेष सिंह चैहानदीवान चन्द्र चैधरीराजवीर सिंहधरमेन्द्र मलिकसतीष ओझाराजपाल षर्मादिनेष सिंहराजवीर सिंह जादौनरणजीत सिंहडानोसिंह आदि सम्मिलित रहे।
                किसान पंचायत को मुख्य रूप से चैधरी राकेष टिकैतराश्ट््रीय प्रवक्ता भाकियूबलराम नम्बरदारराजपाल षर्माहरिनाम सिंहदीवान चन्द्र चैधरीधर्मवीर सिंहदिनेष सिंहविनय सिंहचन्द्रपाल फैजी आदि ने सम्बोधित किया। किसान पंचायत में विभिन्न जनपदों के हजारों किसानों ने भाग लिया।
                                                                                                                                                                भवदीय,               

                                                                                                                                                   ( धर्मेन्द्र मलिक )
                                                                                                                                                     मीडिया प्रभारी,
                                                                                                                                                भारतीय किसान यूनियन।