Tuesday, June 2, 2020

सीजन 2020-21 खरीफ की फसलों की खरीद के लिए घोषित समर्थन मूल्य किसानों के साथ धोखा, यह समर्थन मूल्य कुल लागत (सी-2) पर घोषित नहीं :- चौ0 राकेश टिकैत

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सीजन 2020-21 खरीफ की फसलों की खरीद के लिए घोषित समर्थन मूल्य किसानों के साथ धोखा, यह समर्थन मूल्य कुल लागत (सी-2) पर घोषित नहीं :- चौ0 राकेश टिकैत
पिछले पांच वर्षों की सबसे कम मूल्य वृद्धिः-भाकियू


भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता चौ0 राकेश टिकैत जी ने हाल में घोषित सीजन 2020-21 के लिए निर्धारित खरीफ फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य को किसानों के साथ धोखा बताते हुए कहा कि एक बार फिर सरकार ने महामारी के समय आजीविका के संकट से जूझ रहे किसानों के साथ भद्दा मजाक किया है। यह देश के भंडार भरने वाले और खाद्य सुरक्षा की मजबूत दीवार खडी करने वाले किसानों के साथ धोखा है। यह वृद्धि पिछले पांच वर्षों में सबसे कम वृद्धि है। सरकार ने कृषि विश्वविद्यालयों की लागत के बराबर ही समर्थन मूल्य घोषित नहीं किया है। किसानों को कुल लागत सी2 पर 50 प्रतिशत जोड़कर बनने वाले मूल्य के अलावा कोई मूल्य मंजूर नहीं है। सरकार महंगाई दर नियंत्रण करने के लिए देश के किसानों की बलि चढ़ा रही है। इसी किसान के दम पर सरकार कोरोना जैसी महामारी से लड़ पायी है। इस महामारी में खाद्य पदार्थों की आपूर्ति का नहीं मांग का संकट बना हुआ है। सरकार द्वारा धान का समर्थन मूल्य वर्ष 2016-17 में 4.3 प्रतिशत, 2017-18 में 5.4 प्रतिशत, 2018-19 में 12.9 प्रतिशत, 2019-20 में 3.71 प्रतिशत वृद्धि की गयी थी। वर्तमान सीजन 2020-21 में यह पिछले पांच वर्षों की सबसे कम 2.92 प्रतिशत वृद्धि है। सरकार द्वारा घोषित धान के समर्थन मूल्य में प्रत्येक कुन्तल पर 715 रुपये का नुकसान है। ऐसे ही एक कुन्तल फसल बेचने में ज्वार में 631 रुपये, बाजरा में 934रुपये, मक्का में 580 रुपये, तुहर/अरहर दाल में 3603 रुपये, मूंग में 3247 रुपये, उड़द में 3237 रुपये, चना में 3178 रुपये, सोयाबीन में 2433 रुपये, सूरजमुखी में 1985 रुपये, कपास में 1680 रुपये, तिल में 5365 रुपये का नुकसान है।
भारतीय किसान यूनियन सरकार से जवाब चाहती है कि आखिर इस वृद्धि के लिए कौन सा फार्मूला अपनाया गया। भारतीय किसान यूनियन किसानों से आह्वान करती है कि इस अन्याय के खिलाफ सामुहिक संघर्ष शुरू करें। भाकियू मांग करती है कि न्यूनतम समर्थन मूल्य को भी कानून बनाया जाए। न्यूनतम समर्थन मूल्य से कम पर खरीद करने वाले व्यक्ति पर अपराधिक धाराओं में मुकदमा दर्ज किया जाए।

Friday, May 8, 2020

गांव की सीमा पर मजदूरों के लिए भोजन-पानी व छाया में बैठने की व्यवस्था करें किसान- चौ0 राकेश टिकैत

किसानों की तरह खेतीहर मजदूर भी कृषि की रीढ़, घर लौट रहे प्रवासी श्रमिकों का उत्पीड़न बर्दाश्त नहींः- चौ0 राकेश टिकैत
गांव की सीमा पर मजदूरों के लिए भोजन-पानी व छाया में बैठने की व्यवस्था करें किसान:-भाकियू


भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता चौ0 राकेश टिकैत जी ने हजारों मील का पैदल सफर तय कर रहें मजदूरों के उत्पीड़न व परेशानी की खबरों से आहत होकर प्रशासन को चेताते हुए कहा कि पैदल साईकिल से अपनी मंजिल पर जा रहे प्रवासी श्रमिकों का उत्पीड़न बर्दाश्त नहीं होगा। चौ0 टिकैत ने किसानों से अपील करते हुए कहा कि किसान एवं मजदूर के समक्ष कोरोना के इस संकट के समय तबाही का एक नया दौर आ खड़ा हुआ है। ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि आधारित रोजगार न होने के कारण लोग अपने परिवार के भरण-पोषण के लिए पंजाब, हरियाणा, पश्चिमी उत्तर प्रदेश सहित अनेक राज्यों में खेतीहर मजदूर का कार्य कर रहें है। सरकार की उपेक्षा व गलत नीतियों के चलते आये दिन हजारों श्रमिक पंजाब से चलकर लखनऊ, गोण्डा, बस्ती, फर्रूखाबाद, महराजगंज के लिए गुजर रहे है। इन खेतीहर मजदूरों पर पूलिस का अत्याचार जारी है। जिसकी खबरें समाचार पत्रों के माध्यम से प्राप्त हो रही हैं। महामारी के कारण भूखे-प्यासे प्रवासी मजदूर बच्चों सहित अपने गांव की हजारों किलोमीटर दूरी की पैदल यात्रा पर निकले हैं।
मेरी किसानों व भारतीय किसान यूनियन के लोगो  से अपील है कि इन प्रवासी श्रमिकों के लिए अपने गांव की सीमा में भोजन पानी एवं छाया या रूकने की उचित व्यवस्था करायें। प्रवासी श्रमिकों को कैम्प में रोककर पैदल चल रहे लोगों की सूचना प्रशासन को देकर इनके लिए बसों की व्यवस्था कराना सुनिश्चित करें।
                                                                                                         

Friday, May 1, 2020

किसानों से गेंहू खरीद पर उतराई, छनाई व सफाई के नाम पर 20 रुपये काटे जाने पर भाकियू खफा, मुख्यमत्री को लिखा पत्र

माननीय,
श्री योगी आदित्यनाथ जी,
मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश सरकार, लखनऊ।

विषय- उत्तर प्रदेश में किसानों से गेंहू खरीद पर उतराई, छनाई व सफाई के नाम पर 20 रुपये न लिए जाने के सम्बन्ध में।

आदरणीय योगी जी
अवगत कराना है कि उत्तर प्रदेश में किसानों से गेंहू खरीद नीति में उतराई, छनाई व सफाई के नाम पर किसानों से 20 रुपये काटे जा रहे हैं। जो किसानों के साथ अन्याय है। इस वर्ष खराब मौसम के वजह से किसानों की पैदावार में काफी कमी आयी है। किसानों को पहले से ही उनकी लागत का लाभकारी मूल्य नहीं मिल पा रहा है। गेंहू का समर्थन मूल्य तय करते समय भी इस तरह की कोई शर्त नहीं रखी जाती है। मंडी कानून के तहत भी 3 रुपये लिए जाने का प्रावधान है वह भी उस स्थिति में, जब गेंहू की छनाई व तराजू से तुलाई की गयी हो।


वर्तमान में कम्प्यूटरीकृत कांटों से तुलाई व नवीन तकनीकी के थ्रेसर से कटाई के कारण सफाई की कोई आवश्यकता नहीं है। किसानों द्वारा उतराई का कार्य स्वयं किया जाता है। जिसके चलते मंडी कानून भी गौण हो जाता है। किसानों पर उतराई, छनाई व सफाई के नाम पर खरीद एजेन्सियों द्वारा परिवहन का शुल्क वसूला जा रहा है।
कृषि राज्य का विषय है अगर इस तरह का कोई भी खर्च खरीद एजेन्सियों को दिया जाता है तो उसकी धनराशि राज्य सरकार द्वारा जारी की जाए। खरीद एजेन्सियों का खर्च किसानों से लिया जाना किसान हित पर कुठाराघात है।
आपके आग्रह है कि गेंहू खरीद पर किसानों से लिए जाने वाले 20 रुपये प्रति कुन्तल का शुल्क अविलम्ब समाप्त किया जाए।

Wednesday, April 29, 2020

कोविड-19 महामारी के चलते किसानों को हो रहे नुकसान की भरपाई हेतु 1.5 लाख करोड़ का आर्थिक पैकेज दिए जाने हेतु भारतीय किसान यूनियन का पत्र माननीय प्रधानमंत्री जी के नाम

                                                                                                                                                                                                                                                                                                               29.04.2020
माननीय,
श्री नरेन्द्र मोदी जी,
प्रधानमंत्री भारत सरकार,
साउथ ब्लाॅक नई दिल्ली।

विषय- कोविड-19 महामारी के चलते किसानों को हो रहे नुकसान की भरपाई हेतु 1.5 लाख करोड़ का आर्थिक पैकेज दिए जाने हेतु। 
आदरणीय श्री मोदी जी
आपके संज्ञान में लाना है कि कोविड-19 महामारी के चलते देश में लाॅकडाउन लगाना पड़ा। देशहित में यह अच्छा कदम था, लेकिन लाॅकडाउन की घोषणा उस समय करनी पड़ी जब किसान रबी की कटाई एवं खरीफ की बुवाई की तैयारी कर रहा था। असमय बारिश के कारण किसानों की फसलों की कटाई 15 दिन लेट हो चुकी थी। लाॅकडाउन की घोषणा के बाद किसानों की फसलों की कटाई हेतु लेबर मिलना मुश्किल हो गया था। जिसके चलते किसानों के सामने भारी संकट खड़ा हो गया था। परिवहन के साधन बन्द होने के कारण किसानों की फल, सब्जी या तो खेत में सड़ गयी थी या उनके भाव नहीं मिल रहे थे। जिसके चलते किसानों को अपनी फसलों को फेंकने या नष्ट किये जाने के अलावा कोई विकल्प नहीं था। देश के तमाम हिस्सों से टमाटर, लौकी, तुरई, खीरा, अंगूर, सन्तरा, लोकाट, लीची को फेंकने की खबरें आ रही हैं। जिसके चलते किसानों के पास खरीफ की बुवाई का संकट है। किसान असमंजस में है कि आखिर उनकी समस्या सुलझाने के लिए सरकार द्वारा आवश्यक कदम क्यों नहीं उठाए जा रहें हैं। लाॅकडाउन के चलते सब्जियों व फल के किसानों को 80 प्रतिशत, फूल की किसान को 100 प्रतिशत व दूध के किसान को 50 प्रतिशत नुकसान हुआ है। इस संकट की घडी में भी किसान जान हथेली पर रखकर खेत में कार्य कर रहा है। आज किसानों के दम पर ही देश कोरोना से लड़ पा रहा है। अगर देश में खाद्य सुरक्षा न होती तो कोरोना से ज्यादा भूख से मौतें हो चुकी होती।
भारतीय किसान यूनियन पत्र के माध्यम से भारत सरकार से निम्न मांग करती है-
1. लाॅकडाउन के अन्तर्गत फल, सब्जी, दूध, पोल्ट्री, फिशरीज, मधुमक्खी पालक, फूल उत्पादक किसानों के नुकसान की भरपाई हेतु भारत सरकार द्वारा अविलम्ब 1.5 लाख करोड़ का पैकेज दिया जाए।
2. किसान सम्मान निधि का लाभ पहली किश्त की तरह सभी किसानों को दिया जाए। किसान सम्मान निधि की राशि को 6 हजार रुपये से बढ़ाकर 24 हजार रुपये किया जाए।
3. किसानों की सभी तरह की फसलें कपास, गेंहू, चना, सरसों, सब्जियों की खरीद की जाए।
4. लम्बे समय से मौसम की मार झेल रहे किसानों को गेंहू पर 200 रुपये कुन्तल बोनस दिया जाए।
5. किसानों के सभी तरह के कर्ज के ब्याज पर एक साल की छूट व खरीफ की बुवाई में खाद, बीच की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए।
6. फल, सब्जी, फूल उत्पादक किसानों की फसली ऋण माफ किए जाएं।
7. देश में अन्न की आत्मनिर्भरता के साथ-साथ दलहन व खाद्य तेल में भी देश को आत्मनिर्भर बनाया जाए। कृषि आयात पर देश की निर्भरता को समाप्त करने हेतु खाद्य तेल व दलहन उत्पादन के लिए किसानों को प्रोत्साहित कर उनकी फसलों की सरकारी खरीद की जाए।
                                                                                                       आपका

                                                                                              चौ0 राकेश टिकैत                                                                                                                         (राष्ट्रीय प्रवक्ता भाकियू)   

Wednesday, September 5, 2018

खेती के मुद्दों को लेकर भारतीय किसान यूनियन 23 सितम्बर से 2 अक्टूबर 2018 तक हरिद्वार टिकैत घाट से दिल्ली किसान घाट तक होने वाली किसान क्रान्ति यात्रा में शामिल रहेंगे समन्वय समिति के सभी कि


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खेती के मुद्दों को लेकर भारतीय किसान यूनियन 23 सितम्बर से 2 अक्टूबर 2018 तक हरिद्वार टिकैत घाट से दिल्ली किसान घाट तक होने वाली किसान क्रान्ति यात्रा में शामिल रहेंगे समन्वय समिति के सभी किसान संगठन


   भारत के किसान आन्दोलन की समन्वय समिति की बैठक का आयोजन दिल्ली में किया गया। जिसमें किसानों की समस्याओं पर गहनता से विचार कर कुछ महत्वपूर्ण मुद्दों पर देश में बड़ा आन्दोलन चलाने का निर्णय लिया गया। बैठक में उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, मध्यप्रदेश, राजस्थान, कर्नाटक, तमिलनाडु के किसान नेताओं ने भाग लिया। बैठक में आज एक संवाददाता सम्मेलन के आयोजन का निर्णय हुआ। सम्मेलन में आये किसान नेताओं ने कहा कि खेती किसानी के मुद्दों को लेकर भारतीय जनता पार्टी की देश व प्रदेश की सरकार किसानों से किये गये वादे नहीं निभा पा रही है। सरकार के चार साल पूरे हो जाने के बाद भी जगह-जगह खड़े हो रहे किसान आन्दोलन इस बात का प्रमाण है कि भारतीय जनता पार्टी की सरकार किसानों की समस्याओं के प्रति गम्भीर नहीं है। सरकारी रिपोर्ट के अनुसार किसान खेती छोड़ रहे हैं। किसानों की आत्महत्यायें रूकी नहीं है, बल्कि बढ़ रही है। किसानों को उनकी फसल का उचित मूल्य न मिलने के कारण कर्ज का भार बढ़ रहा है। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना किसानों के हित में न होकर बीमा कम्पनियों के हित में कार्य कर रही है। देश के गन्ना किसानों पर लगभग 19 हजार करोड़ रुपया गन्ना सीजन बन्द होने के बाद भी बकाया है। घोषणा पत्र में भारतीय जनता पार्टी ने 14 दिन में गन्ना भुगतान की बात कही थी। भारतीय जनता पार्टी का यह वादा भी किसानों के लिए जुमला ही साबित हुआ है। किसान के नाम पर बने एक आयोग की रिपोर्ट पिछले 15 साल से धूल चाट रही है। उसे लागू करना तो दूर आज तक उस पर संसद में चर्चा भी नहीं हुई। सरकारों द्वारा किसानों का उत्पीड़न जारी है। 
समन्वय समिति द्वारा निर्णय लिया गया कि भारतीय किसान यूनियन द्वारा किसानों के मुद्दों को लेकर 23 सितम्बर 2018 से हरिद्वार टिकैत घाट से किसान क्रान्ति यात्रा चलकर 2 अक्टूबर को किसान घाट नई दिल्ली पहुँचेगी। जिसमें बड़ी संख्या किसान अपने वाहनों के साथ पैदल चलकर दिल्ली तक जायेंगे। 
किसान क्रान्ति यात्रा में समन्वय समिति के सभी संगठनों का पूर्णतः समर्थन है। सभी किसान संगठन किसान क्रान्ति यात्रा में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करेंगे। 
किसान क्रान्ति यात्रा का आयोजन निम्न मुद्दों को लेकर किया जा रहा है-
1. देश के किसानों की सभी फसलों का (फल, सब्जियां व दूध) वैधानिक उचित और लाभकारी न्यूनतम समर्थन मूल्य डा. स्वामीनाथन द्वारा सुझाये गये ब2 फार्मूले के अनुसार, कृषि विश्वविद्यालय की वास्तविक लागत के आधार पर तय किया जाए व उस पर कम से कम 50ः लाभ जोड़कर समर्थन मूल्य घोषित किया जाए एवं साथ ही साथ यह भी सुनिश्चित किया जाए कि मंडी में गुणवत्ता मापदंड के उत्पादन का भाव किसी भी कीमत पर समर्थन मूल्य से कम न हो। ऐसा न होने पर दंड का प्रावधान किया जाए। सभी फसलों की शत-प्रतिशत सरकारी खरीद की गारंटी दी जाए।
2. देश के किसानों के सभी तरह के कर्ज माफ किये जाएं। देश के किसानों पर लगभग 80 प्रतिशत कर्ज राष्ट्रीयकृत बैंकों का है। देश के किसानों के सभी तरह के कर्ज (राष्ट्रीयकृत बैंक/सहकारी बैंक/साहुकार) एक ही समय में बिना किसी समय सीमा के भारत सरकर के माध्यम से माफ किये जाएं।
3. पिछले 10 वर्षोंं में खेती में हो रहे नुकसान के कारण सरकारी रिकार्ड के अनुसार 3 लाख से अधिक किसानों ने आत्महत्या की है। यह विषय पूरे देश के लिए शर्मनाक है। यह सिलसिला आज भी रूक नहीं पा रहा है। आत्महत्या करने वाले किसानों के परिवार का पुनर्वास करते हुए परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी दी जाए।
4. प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना से किसानों को लाभ मिलने के बजाए बीमा कम्पनियों को लाभ मिल रहा है। योजना में बदलाव करते हुए प्रत्येक किसान को ईकाई मानकर सभी फसलों में स्वैच्छिक रूप से लागू किया जाए।
5. किसानों की न्यूनतम आमदनी सुनिश्चित की जाए। लघु एवं सीमान्त किसानों को 60 वर्ष की आयु के बाद कम से कम 5000 रुपये मासिक पेंशन दी जाए।
6. देश में आवारा पशुओं जैसें-नीलघोडा, जंगली सुअर आदि के द्वारा किसानों की फसलों को पूर्णतः नष्ट कर दिया जाता है। जिससे देश की खाद्य सुरक्षा व खेती दोनों खतरें में हैं। जंगली जानवरों से सुरक्षा हेतु क्षेत्रीय आधार पर वृहद कार्य योजना बनाई जाए। देश के कुछ राज्यों में प्रचलित अन्ना प्रथा पर रोक लगाई जाए।
7. किसानों का बकाया गन्ना भुगतान ब्याज सहित अविलम्ब कराया जाए।
8. किसानों को सिंचाई हेतु नलकूप की बिजली निःशुल्क उपलब्ध कराई जाए।
9. राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण द्वारा राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में 10 वर्ष से अधिक डीजल वाहनों के संचालन पर लगाई गई रोक से किसानों के ट्रैक्टर, पम्पिंग सैट, कृषि कार्य में प्रयोग होने वाले डीजल इंजन को (एंटिक कारों के आधार पर) मुक्त किया जाए।
10. मनरेगा को खेती से लिंक किया जाए।
11. खेती में काम आने वाली सभी वस्तुओं को जीएसटी से मुक्त किया जाए।
12. कृषि को विश्व व्यापार संगठन से बाहर रखा जाए।
13. देश में पर्याप्त मात्रा में पैदावार होने वाली फसलों का आयात बन्द किया जाए। एसियान मुक्त व्यापार समझौते की आड़ में कई देशों द्वारा ऐसी वस्तुओं का निर्यात किया जा रहा है जिसका वह उत्पादक नहीं है। ऐसे मामलों में प्रतिबंध लगाया जाए।
14. देश में सभी मामलों में भूमि अधिग्रहण एवं पुनर्वास अधिनियम 2013 से ही किया जाए। भूमि अधिग्रहण को केन्द्रीय सूची में रखते हुए राज्यों को किसान विरोधी कानून बनाने से रोका जाए।
15. किसानों की समस्याओं पर संसद का विशेष संयुक्त अधिवेशन बुलाया जाए। जिसमें एक माह तक किसानों की समस्याओं पर चर्चा कर समाधान किया जाए।
संवाददाता सम्मेलन में भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता चौ0 राकेश टिकैत, राष्ट्रीय महासचिव चौ0 युद्धवीर सिंह, राजपाल शर्मा राष्ट्रीय महासचिव, कर्नाटक राज्य रैयत संघ के प्रदेश अध्यक्ष के0टी0 गंगाधर, कर्नाटक राज्य रैयत संघ के उपाध्यक्ष जी0टी0 रामास्वामी, सुभाष चौधरी अध्यक्ष राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र भाकियू, हरियाणा के प्रदेश अध्यक्ष रतनसिंह मान, पंजाब के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष हरेन्द्र सिंह लाखोवाल, मध्य प्रदेश के प्रदेश अध्यक्ष जगदीश सिंह, दिल्ली के प्रदेश अध्यक्ष विरेन्द्र डागर मौजूद रहे।
संवाददाता में पधारे सभी संवाददाताओं/छायाकार/कैमरामेन का आभार व्यक्त करते हुए आशा करता हूँ कि आपके द्वारा किसान क्रान्ति यात्रा में भरपूर सहयोग दिया जाएगा।

Friday, October 27, 2017

प्रदेश सरकार द्वारा घोषित गन्ना मूल्य नाकाफी, चीनी मिलों से सरकार की मिलीभगत के चलते गन्ना किसानों के हितों पर किया कुठाराघातः- चौ0 राकेश टिकैत

प्रदेश सरकार द्वारा घोषित गन्ना मूल्य नाकाफी, चीनी मिलों से सरकार की मिलीभगत के चलते गन्ना किसानों के हितों पर किया कुठाराघातः- चौ0 राकेश टिकैत
 गन्ना मूल्य के विरोध में कल भाकियू प्रदेश भर में जिला मुख्यालयों पर जलायेगी गन्ने की होलीः- भाकियू
                                                                                               दिनांक 27 अक्टूबर 2017

उत्तर प्रदेश के चुनावों में गन्ना मूल्य, गन्ना बकाया व घटतौली का मुद्दा चुनावी जनसभाओं में उठाने वाले माननीय प्रधानमंत्री मोदी जी अपनी सरकार द्वारा ही उत्तर प्रदेश के गन्ना किसानों को गन्ने का लाभकारी मूल्य दिलाने में असफल रहे। गन्ना किसानों की भावनाओं से खेलकर किसानों के दम पर सत्ता में आयी भारतीय जनता पाटी की सरकार द्वारा पैराई सत्र 2017-18 हेतु गन्ने का मूल्य घोषित किया गया। गन्ना मूल्य में 10 रुपये की वृद्धि कर गन्ना किसानों के साथ भद्दा मजाक किया है। योगी आदित्यनाथ की सरकार में भी गन्ना किसानों के साथ पूर्ववर्ती सरकारों जैसा नियमित व्यवहार किया गया है। गन्ना मूल्य में वृद्धि तुलनात्मक रूप से महंगाई दर में हुई वृद्धि से भी कम है। 
भारतीय जनता पार्टी द्वारा उत्तर प्रदेश के चुनाव का दौरान जारी संकल्प पत्र में उचित और लाभकारी मूल्य देने की बात कही थी लेकिन मिल मालिक और शर्मायेदारों के दबाव में उत्तर प्रदेश की सरकार गन्ना किसानों को लागत एवं श्रम पर आधारित मूल्य दिलाने में भी नाकाम रही। वर्तमान में गन्ना इस वर्ष में डीजल, बिजली, पेस्टीसाईड्स, खाद के दाम बढ़ने से गन्ना किसानों की गन्ना किसानों की लागत में काफी वृद्धि हुई है। गन्ना किसानों की एक कुंतल गन्ना पैदा करने में लगभग 325 रुपये लागत आ रही है। उत्तर प्रदेश में गन्ना मूल्य तय करने को लेकर आयोजित बैठक में भी किसानों ने अपनी लागत का आंकड़ा गन्ना विभाग को दिया था। तमाम परिस्थितियों को दरकिनार करते हुए एक बार फिर उत्तर प्रदेश सरकार चीनी मिलों के पक्ष में खड़ी दिखाई प्रतीत हो रही है। भाजपा के वादे के अनुसार गन्ना किसानों को 450 रुपये प्रति कुन्तल दाम मिलना चाहिए, लेकिन गन्ना किसानों का इस्तेमाल राजनीतिक दलों द्वारा वोट बैंक के रूप में किया जाता रहा है। इतिहास गवाह है कि सत्ता में आने के बाद राजनीतिक दल केवल चुनावी वर्ष में गन्ने के मूल्य में थोडी वृद्धि करते हैं। उत्तर प्रदेश में सरकार चीनी मिल मालिकों के संगठन के दबाव में कार्य करती है। पिछले वर्ष अखिलेश यादव द्वारा गन्ना मूल्य में 25 रुपये की वृद्धि की थी। जिसको भाजपा के प्रवक्ताओं द्वारा नाकाफी बताकर 450 रुपये प्रति कुन्तल की मांग कर रहे थे, आज वही प्रवक्ता 10 रुपये की वृद्धि को मील का पत्थर साबित करने में लगे हैं। उत्तर प्रदेश की करीब 50 लाख बेबस गन्ना किसानों में सरकार के प्रति बेहद रोष है। वर्तमान सत्र में रिकवरी के मामले में उत्तर प्रदेश ने सभी राज्यों को पीछे छोड़ दिया है, जिसका लाभ भी चीनी मिल मालिकों को है। 
भारतीय किसान यूनियन सरकार द्वारा घोषित मूल्य पर संतुष्ट नहीं है। उत्तर प्रदेश सरकार से मांग करती है कि गन्ना मूल्य पर पुनर्विचार करते हुए अपने संकल्प पत्र में किये गये वादे के अनुसार गन्ने का मूल्य 450 रुपये प्रति कुन्तल घोषित कर किसानों को लाभकारी मूल्य दें अन्यथा भाकियू पूरे प्रदेश में इसके विरूद्ध आन्दोलन करेगी। कल भाकियू प्रदेश भर में जिला मुख्यालयों पर गन्ना जलाकर अपना विरोध दर्ज करायेगी।

Friday, August 4, 2017

Ch. Naresh Tikait meet CM Yogi adityanath


भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय अध्यक्ष चौ0 नरेश टिकैत जी के नेतृत्व में भाकियू के प्रतिनिधिमंडल ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ के आवास 5 कालिदास मार्ग पर भेंट कर किसानों की समस्याओं पर चर्चा कर समाधान किये जाने की मांग करते हुए कहा कि प्रदेश में कानून व्यवस्था से लेकर किसान समस्याओं पर संतोषजनक कार्य नहीं हो पा रहा है। गन्ना भुगतान एवं ब्याज, आलू की खरीद, धान खरीदने की शत-प्रतिशत व्यवस्था, जंगली जानवरों से हो रहे नुकसान, रंगराजन कमेटी आदि पर विस्तृत चर्चा की। किसानों की समस्याओं पर गौर करते हुए मुख्यमंत्री महोदय ने आश्वासन दिया कि किसानों की इच्छा के विरूद्ध प्रदेश में रंगराजन कमेटी की रिपोर्ट लागू नहीं होगी। किसानों से शत-प्रतिशत धान खरीद की जायेगी। जंगली जानवरों एवं पालतू पशुओं से किसानों की फसल की सुरक्षा हेतु आवश्यक इंतजाम एवं चारागाह की जमीन कब्जामुक्त कराकर पशुशालाओं का निर्माण कराया जाऐगा। किसानों की कर्जमाफी पर पुनर्विचार किये जाने का भी आश्वासन दिया गया। कोल्ड स्टोरेज सम्बन्धित किराया तय करने की धारा 29 को समाप्त करने एवं आलू का निर्यात पर परिवहन सब्सिडी व ग्रेडिंग खत्म करने का आश्वासन दिया। वार्ता में राजेश चौहान, दीवानचंद चौधरी, बलराम लम्बरदार, राजपाल शर्मा, राजवीर सिंह जादौन, केतकी सिंह, हरनाम सिंह वर्मा, धर्मेन्द्र मलिक मौजूद रहे।




ज्ञापन
माननीय,
श्री योगी आदित्यनाथ जी,
मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश सरकार,
लखनऊ।
आदरणीय श्री योगी जी
प्रदेश में भाकियू हमेशा किसानों के लिए संघर्ष करती रही है। प्रदेश की जनसंख्या का 65 प्रतिशत हिस्सा प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से कृषि से जुड़ा है। किसान के अत्यधिक परिश्रम के बाद भी उसको उसकी मेहनत के अनुसार लाभ नहीं मिल पाता। किसानों पर कर्ज का भार बढ़ता जा रहा है, एन0एस0एस0ओ0 की रिपोर्ट के अनुसार अगर कोई दूसरा धंधा मिले तो 50 प्रतिशत किसान खेती छोडने को तैयार है। प्रदेश के किसानों की समस्याओं की सूची लम्बी होती जा रही है।
प्रदेश का किसान मानसून की विफलता, सूखा, फसल उत्पादन में प्रयोग होने वाले उत्पादों की कीमतों में वृद्धि और फसलों के मूल्य में गिरावट, ऋण का अत्यधिक बोझ आदि परिस्थितियों के कारण संकट में है। आपकी सरकार ने 36,359 करोड़ रुपये का ऋण माफ कर किसानों को राहत दी है। भाकियू इसका स्वागत करती है। आज दिनांक 31.07.2017 झूलेलाल पार्क, लखनऊ में आयोजित किसान पंचायत के माध्यम से निम्न मांग करती है। किसानों की मुख्य मांगे निम्नलिखित है-
1. फसलों का लाभकारी मूल्य-डॉ0 स्वाममीनाथन रिपोर्ट को लागू किया जाये और किसानों को फसल लागत मूल्य से 60 प्रतिशत अधिक न्यूनतम समर्थन मूल्य देने का फॉर्मूला तुरंत लागू किया जाए। फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य से नीचे की खरीद को अपराध माना जाये। सभी मुख्य फसलों, फलों, सब्जी व दूध को न्यूनतम समर्थन मूल्य के आधीन लाया जाए।
ऽ प्रदेश के आलू किसानों की पैदावार लागत 800 रूपये प्रति कुन्तल है। आलू का समर्थन मूल्य 1000 रूपये प्रति कुन्तल तय किये जाने एवं ग्रेडिंग समाप्त किये जाने की आवश्यकता है। धारा-29 को समाप्त करते हुए सरकार कोल्ड स्टोर का किराया तय करने का अधिकार अपने पास सुरक्षित करे। किसान हित में आलू का निर्यात कराया जाय।
ऽ धान खरीद हेतु समुचित क्रय केन्द्रों की स्थापना की जाय एवं प्रदेश के सभी किसानों शत-प्रतिशत धान खरीद की जाय।
2. गन्ना- प्रदेश के गन्ना किसानों का बकाया भुगतान अविलम्ब कराया जाए। पिछली सरकार गलत तरीके से तीन सत्रों का गन्ना भुगतान पर मिलने वाला ब्याज गलत तरीके से माफ कर दिया गया था। सरकार के आदेश को उच्च न्यायालय इलाहाबाद द्वारा निरस्त कर दिया गया है। किसानों को ब्याज का भुगतान कराया जाए।
ऽ प्रदेश सरकार के पास केवल गन्ने की फसल मूल्य तय करने का अधिकार है सरकार को यह समाप्त नहीं करना चाहिए। प्रदेश में रंगराजन कमेटी की सिफारिश को लागू नहीं किया जाय।
3. ऋण- प्रदेश सरकार द्वारा की गई ऋण माफी का भारतीय किसान यूनियन स्वागत करती है। सरकार द्वारा जो ऋण माफी की गई है वह पर्याप्त नहीं है। भाजपा की चुनावी घोषणा के अनुसार सभी किसानों का पूर्णतः घोषणा की तारीख तक का कर्ज माफ किया जाय। फसली ऋण ही नहीं सभी तरह के कृषि ऋण शामिल किये जायें।
ऽ खरीफ का ऋण वितरण 1 अप्रैल से 31 अगस्त तक और रबी का ऋण 1 सितम्बर से 31 मार्च तक होता है। किसान को खरीफ व रबी फसली ऋण एक साथ दिया जाए। फसली श्रण का एक चौथाई हिस्सा कृषि आदान के रूप में क्रय करने की अनिवार्यता समाप्त की जाए।
4. बिजली- डार्क जोन में किसानों को निजी नलकूपों के ऊर्जीकरण पर गलत तरीके से लगाये गये प्रतिबन्ध को समाप्त करते हुए किसानों को निजी नलकूप के कनेक्शन जारी किया जाए। किसानों के नलकूप से पूरे प्रदेश में 5 हॉर्स पावर का बिल लिया जाय। सामान्य योजना में किसानों को दी जाने वाली सब्सिडी बढ़ाई जाय। किसानों की लाइन 300 से घटाकर 190 मीटर किये जाने के आदेश को समाप्त किया जाय।
5. भूमि अधिग्रहण- प्रदेश के विभिन्न जनपदों जैसे-कानपुर जनपद की घाटमपुर तहसील के गांव लौहरीमऊ सहित 8 गांव की जमीन नवेली पावर प्लांट हेतु अधिग्रहण की गयी है। जनपद अम्बेड़करनगर के बुद्ध परिपथ, जनपद कानपुर के बिल्लौर क्षेत्र में लखनऊ एक्सप्रेस-वे, कानपुर में रेलवे फ्रंट कॉरिडोर, मेरठ में मेरठ विकास प्राधिकरण, मुजफ्फरनगर-सहारनपुर में रेलवे फ्रंट कॉरिडोर के भूमि अर्जन में किसान लम्बे समय से आंदोलनरत् है। ललितपुर पावर प्लान्ट सहित सभी सम्बन्धित जनपदों के जिलाधिकारी को निर्देशित कर किसानों के साथ वार्ता कर विवादों का समाधान कराया जाए। सभी विवादित अधिग्रहण पर वर्तमान कानून के आधार पर 04 गुना मुआवजा दिलाया जाय।
6. सिंचाई- प्रदेश में नई नहरों के निर्माण एवं चौगामा नहर परियोजना व बुंदेलखण्ड पंचनदा बांध परियोजना को अविलम्ब पूरा किया जाए।
ऽ नहरों के पानी टेल तक पहुंचाने व टेल के किसानों के सम्पर्क नम्बर रखने व उस पर सम्पर्क कर कृषकों से यह सुनिश्चित करने की टेल तक पानी पहुंच रहा है, की कारगर व्यवस्था की जाए एवं प्रदेश के नहरों व बाँधों में जमा सिल्ट को साफ कराया जाय।
7. कृषि वार्निकी- कृषि वार्निकी के अन्तर्गत किसानों द्वारा पॉपलर, सागौन, यू० के० लिप्टिस की खेती की जा रही हैं। किसानों का उत्पीड़न मण्ड़ी समिति व वन विभाग द्वारा किया जा रहा हैं। कृषि वार्निकी के अन्तर्गत आने वाले सभी वृक्षों पर सभी जनपदों में कटाई एवं ढुलाई पर लगाये गये प्रतिबन्ध को समाप्त करते हुए मण्ड़ी शुल्क भी समाप्त किया जायें। मेंथा की खेती किसानों की नकदी फसल है। मेंथा को फसल का दर्जा देते हुए मण्ड़ी शुल्क समाप्त किया जायें।
8. बुंदेलखण्ड-पिछले 10 वर्षो से बुन्देलखण्ड के किसान सूखा व असमय बारिश की मार झेल रहे है, जिससे किसानों पर कर्ज का बडा भार हो गया है। आये दिन बुन्देलखण्ड में किसानों द्वारा आत्महत्या की जा रही है। बुंदेलखंड के किसानों का पलायन रोकने एवम आजीविका के संकट के समाधान हेतु एक संयुक्त समिति का गठन किया जाए। बुन्देलखण्ड़ के किसानों के सभी कर्ज माफ किये जायें।
9. प्रदेश में आवारा पशुओं जैसे नीलगाय, जंगली सुअर आदि के द्वारा किसानों की फसलों को नष्ट किया जा रहा है। सरकार द्वारा इसकी रोकथाम हेतु आवश्यक कार्यवाही की जाये। बुंदेलखण्ड में अन्ना प्रथा पर कानूनी प्रतिबंध लगाया जाए।
10. मुकदमें- आन्दोलन के दौरान किसानों पर सभी मुकदमे वापस लिये जाये। जनपद कुशीनगर एवं फैजाबाद,कानपुर, हमीरपुर में किसानों पर लगाये गये झूठे मुकदमे समाप्त किये जाएं। जेल में बंद किसानों को रिहा किया जाए।
11. किसान आय आयोग का गठन करते हुए किसानों की भागीदारी सुनिश्चित की जाए।
12. प्रदेश में समान शिक्षा सामान्य पाठ्यक्रम लागू करके एक तरह की शिक्षा व्यवस्था लागू किया जाय। प्रदेश में सभी को समान चिकित्सा सुविधा उपलब्ध करायी जाय।
13. प्रदेश के पात्र व्यक्तियों के राशन कार्ड नहीं बन पा रहे हैं इसकी जांच कराकर राशन कार्ड उपलब्ध कराये जायें।
14. प्रदेश में किसानों को पेंशन दी जाय और सभी तरह की पेंशन जैसे विधवा, वृद्धा के बहुत सारे पात्र बजट न होने के कारण इस सुविधा से वंचित रह जाते हैं। इसमें बजट बढ़ाया जाय।